केंद्रीय मंत्री Dr. Jitendra Singh ने कहा कि भारत महत्वपूर्ण खनिजों की खोज को बढ़ाने, स्टार्टअप आधारित खनन इकोसिस्टम विकसित करने और मजबूत घरेलू वैल्यू चेन बनाने की प्रक्रिया में है, ताकि आयात पर निर्भरता कम की जा सके।
“National Mineral Exploration and Development Trust” (NMET) की गवर्निंग बॉडी की बैठक को संबोधित करते हुए, जो GPOA कॉम्प्लेक्स में आयोजित हुई, डॉ. जितेंद्र सिंह ने अन्वेषण को तेज करने, घरेलू क्षमता को मजबूत करने और महत्वपूर्ण खनिज क्षेत्र में भागीदारी बढ़ाने के लिए प्रमुख प्राथमिकताएं निर्धारित कीं।
इस बैठक की सह-अध्यक्षता केंद्रीय कोयला एवं खनन मंत्री तथा NMET की गवर्निंग बॉडी के अध्यक्ष G. Kishan Reddy ने की। बैठक में खनन मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी, CSIR–Institute of Minerals and Materials Technology के निदेशक, एटॉमिक मिनरल्स डायरेक्टरेट के निदेशक, परमाणु ऊर्जा विभाग के प्रतिनिधि, अन्वेषण एजेंसियों के अधिकारी तथा राजस्थान, तेलंगाना और महाराष्ट्र सहित विभिन्न राज्यों के प्रतिनिधि शामिल हुए।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि विशेष रूप से लिथियम और अन्य महत्वपूर्ण खनिजों की खोज की गति को वैश्विक मांग और भारत की रणनीतिक आवश्यकताओं के अनुरूप बढ़ाने की जरूरत है। उन्होंने राजस्थान के सिवाना क्षेत्र और जम्मू-कश्मीर के सलाल-हैमना ब्लॉक में चल रहे कार्यों का उल्लेख करते हुए अन्य संभावित क्षेत्रों में भी स्वदेशी अन्वेषण प्रयासों का विस्तार करने पर जोर दिया।
मंत्री ने कहा कि भारत को खनन और महत्वपूर्ण खनिज क्षेत्र में भारतीय कंपनियों और स्टार्टअप्स के प्रवेश के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करना होगा। बायोटेक स्टार्टअप इकोसिस्टम की सफलता का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इसी तरह का संस्थागत सहयोग, लक्षित प्रोत्साहन और मार्गदर्शन खनन तकनीकों और अन्वेषण विधियों में नवाचार को बढ़ावा दे सकता है।
उन्होंने कहा कि निजी अन्वेषण एजेंसियों की क्षमता बढ़ाना इस क्षेत्र के दीर्घकालिक विकास के लिए आवश्यक है। Notified Private Exploration Agencies (NPEAs) की भूमिका को मजबूत करने, उन्हें तकनीक और वित्त तक बेहतर पहुंच देने और परियोजनाओं की मंजूरी प्रक्रिया को तेज करने की जरूरत है, ताकि निजी क्षेत्र की भागीदारी सार्थक रूप से बढ़ सके।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि तेज मंजूरी, बेहतर खरीद प्रणाली और समय पर प्री-एक्सप्लोरेशन क्लीयरेंस अन्वेषण गतिविधियों की गति बनाए रखने के लिए जरूरी हैं। उन्होंने यह भी कहा कि कई परियोजनाओं में वन स्वीकृति से जुड़ी समस्याएं समय-सीमा को प्रभावित कर रही हैं, जिनके समाधान के लिए समन्वित प्रयास आवश्यक हैं।
स्थानीय भागीदारी पर जोर देते हुए मंत्री ने कहा कि जिन क्षेत्रों में अन्वेषण कार्य चल रहा है, वहां सांसदों और विधायकों को जोड़ा जा सकता है। इससे स्थानीय समुदायों में जागरूकता बढ़ेगी और परियोजनाओं के सुचारू क्रियान्वयन में मदद मिलेगी।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि आयात पर निर्भरता कम करने के लिए एंड-टू-एंड घरेलू सप्लाई चेन का विकास आवश्यक है, जिसमें प्रोसेसिंग और वैल्यू एडिशन भी शामिल है। उन्होंने महाराष्ट्र, ओडिशा, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और गुजरात में विकसित की जा रही प्रोसेसिंग क्षमताओं का उल्लेख किया, जो भारत की वैश्विक खनिज आपूर्ति श्रृंखला में स्थिति को मजबूत करेंगी।
मंत्री ने कहा कि उन्नत तकनीक और विशेषज्ञता के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग की संभावनाओं का उपयोग किया जा सकता है, साथ ही CSIR–IMMT और परमाणु ऊर्जा विभाग जैसे संस्थानों के माध्यम से स्वदेशी तकनीक के विकास पर भी ध्यान दिया जा रहा है।
NMET के कार्यों की समीक्षा करते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने वार्षिक योजनाओं, परियोजना स्वीकृति, वित्तीय सहायता और संस्थागत व्यवस्थाओं पर चर्चा की, जिनका उद्देश्य कार्यकुशलता और परिणामों में सुधार करना है। उन्होंने कहा कि NMET को नवाचार को बढ़ावा देना, अन्वेषण एजेंसियों को सहयोग देना, राज्यों को प्रोत्साहित करना और महत्वपूर्ण खनिजों की पुनर्प्राप्ति के लिए पायलट परियोजनाओं को बढ़ावा देना जारी रखना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि अन्वेषण क्षेत्रों में जागरूकता बढ़ाना जरूरी है, ताकि स्थानीय समुदाय खनिज विकास के दीर्घकालिक लाभों को समझ सकें।
इस अवसर पर G. Kishan Reddy ने कहा कि महत्वपूर्ण खनिज भारत के विकास में अहम भूमिका निभाएंगे और इनके अन्वेषण को प्राथमिकता देने के साथ तेज नीलामी और राज्यों व निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाने की आवश्यकता है।
खनन मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने NMET की गतिविधियों पर जानकारी प्रस्तुत की, जिसमें अन्वेषण परियोजनाओं की प्रगति, स्टार्टअप पहल, परियोजना स्वीकृति प्रणाली और समन्वय व कार्यकुशलता बढ़ाने के उपाय शामिल थे।
