​कोरबा में ‘बचपन की टिकट’ ने रचा इतिहास: 5 हजार महिलाओं ने पारंपरिक खेलों के साथ फिर से जिया अपना बचपन

कार्यक्रम का सार: “बचपन की टिकट”

यहाँ कोरबा में 12-4-2026 को अशोक वाटिका को आयोजित “बचपन की टिकट” कार्यक्रम का संक्षिप्त विवरण दिया गया है:

कार्यक्रम का सार: “बचपन की टिकट”

​कोरबा के अशोक वाटिका में सखी-सहेली महिला समूह द्वारा एक अनोखा आयोजन किया गया, जिसका उद्देश्य महिलाओं को उनकी व्यस्त दिनचर्या से निकालकर बचपन की यादों से जोड़ना था।

मुख्य आकर्षण

  • प्रतिभागी: जिले भर से लगभग 5,000 महिलाओं ने हिस्सा लिया।
  • आयु वर्ग: प्रतियोगिता को दो वर्गों (18-25 वर्ष और 25 वर्ष से अधिक) में बांटा गया था।
  • पारंपरिक खेल: महिलाओं ने प्रतियोगिता के विभिन्न खेल-खो-खो, कबड्डी, बिल्लस, गोटा, हाऊजी, फुगड़ी, चम्मच दौड़, कुर्सी दौड़, रस्सी खींच, बोरा दौड़, जलेबी दौड़ आदि लिय का आनंद लिया
  • छत्तीसगढ़ी संस्कृति: खेलों के साथ-साथ पारंपरिक छत्तीसगढ़ी व्यंजनों के स्टॉल्स भी लगाए गए थे।

प्रमुख उपस्थिति

​कार्यक्रम में भाजपा की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सरोज पांडेय, उद्योग मंत्री लखन देवांगन, और जिलाध्यक्ष गोपाल मोदी सहित कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए।

उद्देश्य और संदेश

​अतिथियों ने कहा कि इस तरह के आयोजन महिलाओं को तनावमुक्त करने, सामाजिक एकता बढ़ाने और अपनी जड़ों से जुड़े रहने का अवसर देते हैं। नेताओं ने इस बात पर जोर दिया कि “उम्र सिर्फ एक संख्या है, असली जोश दिल में होता है।”

​कोरबा के अशोक वाटिका में सखी-सहेली महिला समूह द्वारा एक अनोखा आयोजन किया गया, जिसका उद्देश्य महिलाओं को उनकी व्यस्त दिनचर्या से निकालकर बचपन की यादों से जोड़ना था।

मुख्य आकर्षण

  • प्रतिभागी: जिले भर से लगभग 5,000 महिलाओं ने हिस्सा लिया।
  • आयु वर्ग: प्रतियोगिता को दो वर्गों (18-25 वर्ष और 25 वर्ष से अधिक) में बांटा गया था।
  • पारंपरिक खेल: महिलाओं ने खो-खो, कबड्डी, फुगड़ी, रस्सी कूद, चम्मच दौड़ और जलेबी दौड़ जैसे खेलों का आनंद लिया।
  • छत्तीसगढ़ी संस्कृति: खेलों के साथ-साथ पारंपरिक छत्तीसगढ़ी व्यंजनों के स्टॉल्स भी लगाए गए थे।

प्रमुख उपस्थिति

​कार्यक्रम में भाजपा की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सरोज पांडेय, उद्योग मंत्री लखन देवांगन, और जिलाध्यक्ष गोपाल मोदी सहित कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए।

उद्देश्य और संदेश

​अतिथियों ने कहा कि इस तरह के आयोजन महिलाओं को तनावमुक्त करने, सामाजिक एकता बढ़ाने और अपनी जड़ों से जुड़े रहने का अवसर देते हैं। नेताओं ने इस बात पर जोर दिया कि “उम्र सिर्फ एक संख्या है, असली जोश दिल में होता है।”

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